Saturday, 31 October 2020

भाव लिखे

भाव लिखे
   १
मैंने अपने भाव लिखे थे
 तुम शब्दों में उलझ गये
   शब्दों के अर्थों को लेकर
     भाव गढ़े  नित नये नये

   २
शाखों से झरते फूलों को
  तुमने पतझड़ ही कह डाला
   पलकों पर ठहरे अश्रु को
     खारा पानी ही कह डाला 

   ३
अभी अभी उतरी मन आँगन
 मेरी प्रीत जुन्हाई ले कर
  वातायन क्यों बन्द कर लिये 
   अपनी ही तनहाई ले कर

   ४
कान लगा कर सुनो जरा तो
 स्पन्दन के गीत बुने हैं
  खिली साँझ की रोली ले कर
   कितने कितने रंग चुने हैं

   ५
मंदिर के अर्चन की ध्वनियाँ
 कोलाहल या शोर नहीं है
  दीप आरती के पावन हैं
   निरी अगन के ठौर नहीं है

   ६
इन शब्दों के पीछे पीछे
 रेले चलते हैं भावों के
  भाव मेरे सब प्रीति सने है
    रस में डूबे अनुभावों के

   ७
इन गीतों में तुम ही तुम हो
 अन्तस का आलाप तुम्ही
  अन्तर के तारों से झरता
   नाद तुम्ही अनुनाद तुम्ही

रामनारायण सोनी
25.09.2020

Saturday, 23 May 2020

molvi making

My self Artist raja .....l will art related post on this group....and i request to all members please subscribe my YouTube channel conscience of ARTISTRY 
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And